सितारा

जैसे हो झिलमिलाती सी धूल में एक चमकता सा सितारा

और रौशन हो उसके दीदार से हजारों जहां

बनना ऐसी ही तुम,

ताकत

जिसकी बुनियाद उसके खुदके दिल में है,

और तुम्हारी आग तुम्हारी मुश्किलों को चीरती हुई

दिखाए अपना वजूद, अपनी दुनिया में

तुम्हारा मन हो सितारे की कोख सा,

जिसमें बनती है नई दुनिया के लिए कुछ नई चीजें

और हो तुम्हारा तन उसके ओज सा

कि केवल उसी ओज का उसे कुछ छू सके

आवाज़ को बनाओ सितारे से निकलते उन कणों सा

कि रंग फैलाएं वो सबके मन को आत्मसात कर

बन जाना तुम ऐसा कि आसमान भी झुककर छुए तुम्हें

हवा खुश हो तुममें उड़ान भरकर

और जमीन भरे अपने जख्म तुम्हारी छुअन से।

देना दुनिया को और खुद को भी,

सितारा हो तुम,

मेरा उजला सितारा।

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पता है तुम्हें आज जब तुमने मिलने को कहा
दिल सूखे पत्ते सा हो गया
जिसको सदियों बाद निकाला हो किताब से
चुरमुरा, खूबसूरत सा, तुम्हारी आंखों के जैसा
गम था एक सुबह से, छोड़ आया रास्ते में
मिलना जो था तुमसे

तुम कहती हो मैं कुछ कहता नहीं
हर बार तो बात बीच में काट के खुद बोलने लगती हो
बहुत कुछ होता है तुम्हारे पास कहने को
आज भी था, मैं भी चुप हो जाता हूं
सुकून जो मिलता है तुम्हें सुनकर
तुम्हारी बकबकी तर करती है मुझको

हाथ पकड़कर कहना चाहता था कि तुम मेरी ताकत हो
पर रूक गया ना जाने क्या सोचकर
सात साल जो हो गये हैं, आज तक नहीं किया ऐसा
इतने आजाद होकर भी, कि शायद किसी और के साथ न हो पायें
हम आजाद भी नहीं हो पाते, पहेली सा है ये सब
और मैं जान-बूझकर उलझा हुआ हूं

लगता है तुम ही मेरा आखिरी प्यार हो, जो सबसे पहले हो गया
और अब ना जाने कितने और तलाशने पड़ेंगे
खैर आखिरी को पाने‌ को पहले वाले खत्म तो करने ही पड़ेंगे
क्या अजीब सी उलझन लेके आयी तुम सुकून की तरह
अब रास्ते से वो गम उठा लूंगा और घर चला जाउंगा
जिंदगी यही है जो तुम्हारे साथ बिता लेता हूं

शायद साथ में बूढ़ा होना ऐसा ही होता है
खो जाऊंगा अगर चली गयी तुम
जो भी हो जैसी भी हो, हो तो मेरी ही ना

A Tale of Morning

Mornings are said to be brought by that old man

Who had no faith, no hate and no hands

They say he had a tail

And the bigger teeth

And his shadow walked below

Ground the underneath

And he tolled the night

Long and neverending

He waited to pull it up

With fangs and tails and legs

And strength never spending

They say it was a long era

And millions of nights had died

And the stars were shaking

Out o’ his mighty fright

And years then rolled

And creatures not now slept

In the misty atmosphere of the shivering Earth

All Pariahs gladly wept

Mountains roared and clouds did thunder

Trees screamed in Valhalla under

And then came a golden thread

A thing of beauty unseen before

The corns were corns and fire red

Everyone was screaming in joy

The snake that came from frozen mountains

A crocodile across from farland river

A tree from the valley of nocturne fever

And the owl ocean-side

All had appeals, all had rejections

And then came hovering the second thread

The panic rose high and some of them condemned

And now the fire was yellow

And the snow was melting low

Then the third thread, then the fourth, then more

Chaos touched the peak and everyone cried

Some at beauty, some at horror

With watery eyes they looked now farer

Old man’s fangs glistened

And tail twisted, legs stepped back

Then came the burning sun

And cold was forced to be mellow

Everyone stopped and some went to sleep

At the edge of the morning some did profusely weep

And then the fangs fell

Like diamonds slithering through mist

And tail turned to a hundred petals and to melting wind

The skin then shed to dust

And came a spirit that touched a few creatures

Then the morning rose and smiled

And from those who screamed in horror and those who screamed in joy

They say we all have come from them